लड़की हो तो ऐसी

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लड़का और लड़की दोनों रात को 1 बजे घर से भाग निकले। ट्रेन में बैठने के बाद जब घर पीछे छूटने लगा तो दोनों घबरा गए। लड़की बोली, “सुबह मेरी माँ पता चला तो बहुत रोएँगी। मेरे पापा शुगर और हार्ट के मरीज़ हैं — वो तो मर ही जाएँगे। माँ को ब्लड-प्रेशर भी है, अगर वह मर गई तो…” लड़का शांत होकर बोला, “फालतू की बातें सोचने से किसी का कोई फायदा नहीं — कोई किसी के लिए अब नहीं मरता।” लड़का की बात सुनकर लड़की ने अपने आँसुओं को रोकते हुए कहा, “मेरा दिल घबरा रहा है। अगर मेरे पापा-मम्मी नहीं रहते, तो मेरे छोटे भाई-बहनों का क्या होगा? उनका भविष्य अंधेरे में चले जाएगा। वे सड़क पर आ जाएँगे उनकी शादी तक नहीं हो पाएगी।” लड़का ने उसे भरोसा दिलाया, “अरे तुम कहाँ से कहाँ पहुँच गई? ऐसा कुछ नहीं होगा।” लेकिन लड़की ने धीरे से कहा, “अब मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती। अगले स्टेशन पर उतरकर घर जाऊँगी।” लड़का बोला, “क्या पगला गई हो? साथ जीने की कसमें-वादे कहाँ गए?” लड़की बोली, “मैं अपने माँ-बाप की लाशों पर अपने ख्वाबों का महल नहीं बना सकती। अपने भाई-बहनों के भविष्य को अंधकार में धकेलकर अपने अरमान पूरे नहीं कर सकती। मैं अपनी माँ-बाप की इज़्ज़त को नीलाम करके खुद की नहीं खाऊँगी।” अगले स्टेशन पर लड़की उतर गई और अपने घर वापस चली गई। युवक बस देखता रह गया उसे।

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